जंतर-मंतर का इन्कलाब
इक कलम, इक नोटबुक और वो टैब-मोबाइल साथ
हर पन्नों पर बिखरे सवाल, हर लफ़्ज़ में इक जज़्बात
इस बेहिसाब हिम्मत का भला कोई कैसे करेगा हिसाब
मैं और मेरी आवारगी और वो जंतर-मंतर का इन्कलाब
- अभय सुशीला जगन्नाथ
इक कलम, इक नोटबुक और वो टैब-मोबाइल साथ
हर पन्नों पर बिखरे सवाल, हर लफ़्ज़ में इक जज़्बात
इस बेहिसाब हिम्मत का भला कोई कैसे करेगा हिसाब
मैं और मेरी आवारगी और वो जंतर-मंतर का इन्कलाब
- अभय सुशीला जगन्नाथ
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