मेरा आपके लिए, अपने भी पिता जी को श्रद्धांजलि देने का "धरम- करम"
“शोले” की लौ, और उसके "हुकूमत" का "ज़लज़ला" कभी बुझ नहीं सकता.... “धरम वीर” की बहादुरी के प्रेरक ज़ज़्बे की तरह .. इस "सम्राट" का "राज तिलक" सदियों के लिए "तहलका" मचाता रहेगा... "जीवन-मृत्यु" की ग़मज़दा शाम “यादों की बारात” को उस मोड़ ले आई, जहाँ परदे पे "अनुपमा" सा चमकता हुआ "सत्यकाम" एक “अनमोल” चेहरा, अब बस “पल पल दिल के पास” ही जीवंत रहेगा ! जिसने “फूल और पत्थर” की दृढ़ता से "प्रतिज्ञा" लेकर बताया कि "मेरा गांव मेरा देश" एक "आकाशदीप" है और यहां की जनता "मेरे हमदम मेरे दोस्त" हैं... जब कभी "आया सावन झूम के" तो " यह बोलकर जीना सिखाया कि "आए दिन बाहर के" और “चुपके चुपके” अपनी मुस्कान से हर दुख हल्का कर दिया ! "राजा जानी" धरम जी हर दिल में कभी "लोफर" तो कभी अपनी "शराफत" से अमर “ही-मैन” और "सुपरमैन" बनकर बसते रहेंगे। आज जब आप पर्दे के उस पार चले गए, तो लगता है जैसे ज़िंदगी का एक अध्याय... “ड्रीम गर्ल” की मध...