धड़कनों बसी वो गुमनाम कहानियाँ

 शेर-ओ-शायरी में उतर जाती हैं, धड़कनों बसी वो गुमनाम कहानियाँ,

खामोशी में बयां वो निगेहबानियाँ, अल्हड़ हुस्ना की वो मेहरबानियाँ,

मैं और मेरी आवारगी और फिजाओं बहकती रूहानी रवानियाँ ...

                         

Feeling Motivated and Energetic
पूरी शाम…
उन सब दोस्तों के नाम !
जो कॉलेज की गलियों से चलकर
दिल की धड़कनों तक के सफ़र में
हर मोड़ पर साथ रहे
कभी ठंडी बयार, कभी छाँव बनकर ! - अभय सुशीला जगन्नाथ



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