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To leave behind its gloom... Teenage Bloom

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A teenage glow, that never parts, Still... stealing smiles, and winning hearts... Elegant and exquisite, with youth forever in full bloom, As though time passed everyone else by, but never entered your room, to leave behind its gloom... - Abhay Sushila Jagannath  दिल के सब राज़ खुल गए, किसी से नज़र मिलते ही इश्क़ जगज़ाहिर हो गया, होंठों पे मुस्कान खिलते ही

All heads turned whenever they rode by Rx100

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Two hearts, one bike, forever side by side...  All heads turned whenever they rode by Memoir of unforgettable '90s   "Neighbours' Envy, Owners' Pride" 90s की Rx100 हवा से बातें कराती, इंच इंच भर से बचती बचाती, बनारस की गलियों  के रहगुजर चलते, लंका और विमेंस कॉलेज आँखें चार करते, फैकल्टी में बे-मन से यदा-कदा, हाज़िरी के चककर पड़ते,   और फिर कॉमर्स गेट या उसी चौराहे वाली, अड़ी पर खड़ी, आज फिर उन्ही Rx100 के मालिकों की यादें, मेरे जेहन आन पड़ी... पहली सबसे ज्यादा चलने वाली, अंशु द्विवेदी की जिनके पीछे परमानेंट मेंबर, नविन सिंह और महेश सिंह और यदा कदा आशीष द्विवेदी और मनोज झुंझुनवाला..   दूसरी ज्यादा चलने वाली रितेश भारती की, जिनके पीछे बैठे चेहरे आज भी तारो तजा हैं ; के के सिंह और क्रांतिकारी वीरू सिंह.. तीसरी, सिर्फ फैकल्टी और हॉस्टल के चक्करों में घूमती, लंकेटिंग करती Gym और फिर Gym से संकटमोचन होते लंकेटिंग, इसके मालिक आशीष राय और परमानेंट सवारी प्रमोद गर्ग और अन्ना डॉन अनुराग, और कभी कभी साइन्स फैकल्टी के स्व्घोषित स्वयंभू ,  परन्तु सर्वमान्य हम लोगों...

पुरानी जिल्दों और रद्दी किताबों की कश्तियां

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  पुरानी जिल्दों और रद्दी किताबों की कश्तियां तैयार है नए क्लास के नन्हों को घनघोर बारिश का इंतजार है और सोलहवें सावन इश्कियां कोरा कागज़ बेकरार है #RainyDays #PaperBoat #MonsoonVibes   - अभय सुशीला जगन्नाथ   

मैं वापस आऊंगा !

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इक अधखुली खिड़की पर जाते-जाते, जो किया था वादा..   अक्सर छत की सीढ़ियों पर निभाने का, जो किया था इरादा..  और प्लैटफॉर्म पर नम आँखों का वो आख़िरी, सवाल सीधा सादा ! क्या बस ये इक़रार निभाओगे,  तुम वापस तो आओगे ! मैं वापस आऊंगा ! #Love & #Longing with #Romance & #Reverence #MainVaapasAaunga #मैंवापसआऊंगा   #MainWaapasAaunga #मैंवापिसआऊंगा = GG वाह,, आ गए हो तो जाने की जिद ना करो जा रहे हो तो आने का वादा करो।। बेमिसाल। पंडित ! दिल की गहराइयों में फंसी यादों की गिरहें है !                                               - अभय सुशीला जगन्नाथ

किरणमयी अंकिता

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इस धरा के आदि से, अनादि से उस आस्मां  सिर्फ़ मैं ही हूँ हकीकत, इक मैं ही सारा जहाँ इक बेटी को जनम देकर तैयार किया मैंने माँ   कब आया जेलर !  रुको चाय बनाते हैं , फिर कुछ खाने के लिए बनाया जायेगा ! नूतन ! देखो बाबिया और जेलर आये हैं ! बुआ दादी के यहाँ ही है ! बाद में आएगी ! बिस्कुट पानी लेकर आओ ! फिर हमारी ममेरी बहन किरण दीदी के प्रश्नो का सिलसिला ! और भाई राजन के पढ़ाई का अपडेट ! साथ साथ अगल बगल बिखरी प्रतियोगी परीक्षाओं से भरी किताबों का ढेर ! राजन और नूतन पर सख्ती के साथ साथ, इक माँ की तरह, समझा कर प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने के लिए प्रेरणा देने से लेकर खुद भी उन परीक्षाओं के लिए घर के काम काज के बाद समय देना , ये बस किरण दीदी ही कर सकती थी ! खुद में एक प्रेरणा थी मेरी किरण दीदी ! मुझसे बहुत प्रसन्न रहती थी, क्यूंकि एक तो मैं उनको कभी कभी गणित के सवालों में मदद करता था,  परन्तु ज्यादा वो इस बात पर ज्यादा खुश होती थीं  कि मैं उनके प्रयोगों से बने तरह-तरह व्यंजन जिनकी वह बेहद शौकीन थीं, उनको मैं ना सिर्फ चाव से खाता था, बल्कि यदि कोई कमी हो तो भी बड़े ...

न कभी तूने बुलाया

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तेरा शहर, वो तेरी गलियां यूँ छोड़कर के जाना हुआ, कि फिर न कभी तूने बुलाया, न मेरा ही आना हुआ मैं वापस आऊँगा, बस याद रखना तू वक़्त-ए-दुआ...  - अभय सुशीला जगन्नाथ  

स्प्लेंडर

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इक स्प्लेंडर आज भी गवाह है तेरी रवानगी के, राहों में जिसने बिखेरे थे किस्से आवारगी के, अब भी महकते हैं वो लम्हे मेरी यादों में कहीं, हैदराबादी उस पोरी संग दिल ए दीवानगी के ----------------------------------- गुज़र गए हैं साल मगर मिटे नहीं नक़्श अभी, लॉन्ग राइड और लॉकेटिंग की वो चुस्कियां हर राह पे बाक़ी है असर तेरी हमनवाज़ी के स्पलेंडर पर संग तेरे वो अन्दाज़ बे-अंदाजी के                                              - अभय सुशीला जगन्नाथ