Posts

हम अंजाम-ए-ख़ास लिखेंगे

Image
ख़यालात-ए-बंदगी हम तुझे इक अधूरी प्यास लिखेंगे हक़ीक़त-ए-ज़िंदगी हम तुझे वो आख़िरी साँस लिखेंगे मैं और मेरी आवारगी ताउम्र अब तेरे एहसास लिखेंगे लोग जब फ़ना लिखेंगे, तो हम अंजाम-ए-ख़ास लिखेंगे #Poetry is #Immortal #Soul of #Writing  - अभय सुशीला जगन्नाथ 

वो दोस्तों बीच टिफिन की लूट

Image
  वो दोस्तों बीच टिफिन की लूट, उठा रहे फ़िर मन में हलचल, वो रोटी, पराठे, पूड़ी संग हलवा, वो गोभी-मटर और आलू-परवल, हर इक माँ ने सजाए ममता से, जिनमें अन्नपूर्णा का स्नेह-विह्वल #MothersDay #Mothers #Day अभय सुशीला जगन्नाथ 

सानूं सारियां विसर गईयां राहवां वे, केड़े पासे जाईए सजना

Image
 "सानूं सारियां विसर गईयां राहवां वे, केड़े पासे जाईए सजना" ये किस मोड़ पर तेरी याद ने घर कर लिया, दिल ने बिना तेरे हर राह बेअसर कर लिया, मैं और मेरी आवारगी फिरते हैं यूँ दर-बदर, तेरे इश्क़-ए-सफ़र ख़ुद को सिफ़र कर लिया.. सानूं सारियां विसर गईयां राहवां वे, केड़े पासे जाईए सजना "I have forgotten all the paths, which way should I go, my beloved ?" बहुत दिनों बाद कोई पंजाबी बिरह रूपक के गीत / कविता सुन कर "बिरहा दा सुल्तान" शिव कुमार बटालवी के " माये नी माये, मैं इक शिकरा यार बनाया " और अमृता प्रीतम के " अज्ज आखाँ वारिस शाह नूँ ", जैसे बिरह और दर्द में डूबे पंजाबी कविताओं की याद आ गयी ! आपको मैं  यहाँ एक और बताता चलूँ कि अमृता प्रीतम ने ही अपने समकालीन शिव कुमार बटालवी के लिए "बिरहा दा सुल्तान" ... यह विशेष उपाधि गढ़ी थी। बिरहा पंजाबी शब्द है जो किसी प्रियजन से बिछड़ने के दुःख को व्यक्त करता है, और बाबा फरीद ने ही अपनी कविता, "बिरहा, बिरहा आखिये, बिरहा तून सुल्तान" के माध्यम से बिरहा को एक सर्वोच्च भावना घोषित किया था ! ...

miSSing

Image
 miSSing ! A glimpse of your picture pulls you near, Your smile returns, so vivid and clear ! I scroll through our chats, as if you’re still here... Each word that we shared begins to replay, Soft echoes of love refuse to fade away, Lingering softly in the quiet moments, The deleted ones even find their way… I close my eyes, let memories flow, Through laughter and moments, only we know... Every heartbeat whispers your name anew, A quiet reminder... a discreet cue.... of Missssssssing you !  The more that I wander those times we knew, The deeper I fall into shades of you... And just when I think I’ve made it through, I miss you again… even more than I do... Always, I miss you ! Once ! I missed you... Still .. I am missing you !                          - Abhay Sushila Jagannath 

बगावत होगी इस बार वक्त-ए-दुआ

Image
 बगावत होगी इस बार वक्त-ए-दुआ, तुझसे और तेरे निज़ाम से ऐ जहान-ए-खुदा, तमाम उम्र जिन सांसों से जीना हुआ, उनकी धड़कनों से क्यूंकर की ये सांसे जुदा #श्रद्धांजलि #माँ #बाबूजी अभय सुशीला जगन्नाथ 

कभी वो सितार की सदा, कहीं ख़ामोश वीरानियाँ

Image
कभी वो सितार की सदा, कहीं ख़ामोश वीरानियाँ, तेरे मौसिकी के तरन्नुम में वो उम्दा रूह-ए-रवानियाँ ! लिखेंगे किसी रोज़ सब बनारस की हर वो कहानियाँ, उन घाटों की सीढ़ियों पर अब भी ठहरी ज़िंदगानियाँ ! मैं और मेरी आवारगी और उन गलियों की निशानियाँ ! With your soul in every note, and fire in each song, You draw every heart, and lead them along... With your powerful voice, and spirit so long, You carry each listener, right where they belong ! From campus memories, to heights you now embrace, You rise even brighter, with power and grace...                         - Abhay Sushila Jagannath  

हंसा की हिज़्र-ए-चांदनी

Image
कब तलक गुनगुनाऊँ मैं फ़क़त फ़िराक़ की रागिनी, मेरे अरमानों को भी परवाज़ दे ऐ नाज़नीन हंसिनी, मैं और मेरी आवारगी और हंसा की हिज़्र-ए-चांदनी ! संलग्न छायाचित्र में BHU BSc 98 Batch के  "त्रिदेव" "त्रिमूर्ति" और याराना के संगम की "त्रिवेणी" के त्रिलोकनाथ 🌠 ... बड़े भाई,  KV BHU के सीनियर,  BSc के गुरु सखा और  ABC ( आरा-बलिया-छपरा ) ऑफ भोजपुर के C से... 😲 नहीं-नहीं, भाई ! आप गलत सोच रहे हैं 🤪  A से आरा वाले बाबू साहब के तारीफ़ में C से छपरा वाले के कुछ शब्द... 😁 BHU में 90 के दशक में,  फैकल्टी-फैकल्टी की आवारगी में कभी VT मंदिर, तो कभी बिहारी चाय की दुकान और फ़िर शाम की लंकेटिंग से बचे तो हॉस्टल की आवारा फक्कड़ बैठकी में... ओ हंसिनी , कहां उड़ चली, मेरे अरमानों के पंख लगा के... इस गाने को सुना सुना कर, अपने इश्क़ की कहानी से प्रभावित, मिर्जा ग़ालिब के मशहूर शेर "वो फ़िराक़ और वो विसाल कहां  वो शब-ओ-रोज़ माह-ओ-साल कहां" टाइप का भाव लेकर.. अपने विसाल-ए-यार के गम-ए-इंतजार में...  "त्रिदेव" "त्रिमूर्ति" और याराना के संगम की "त...