मेरा आपके लिए, अपने भी पिता जी को श्रद्धांजलि देने का "धरम- करम"
“शोले” की लौ, और उसके "हुकूमत" का "ज़लज़ला" कभी बुझ नहीं सकता.... “धरम वीर” की बहादुरी के प्रेरक ज़ज़्बे की तरह .. इस "सम्राट" का "राज तिलक" सदियों के लिए "तहलका" मचाता रहेगा...
"जीवन-मृत्यु" की ग़मज़दा शाम “यादों की बारात” को उस मोड़ ले आई, जहाँ परदे पे "अनुपमा" सा चमकता हुआ "सत्यकाम" एक “अनमोल” चेहरा, अब बस “पल पल दिल के पास” ही जीवंत रहेगा !
जिसने “फूल और पत्थर” की दृढ़ता से "प्रतिज्ञा" लेकर बताया कि "मेरा गांव मेरा देश" एक "आकाशदीप" है और यहां की जनता "मेरे हमदम मेरे दोस्त" हैं...
जब कभी "आया सावन झूम के" तो " यह बोलकर जीना सिखाया कि "आए दिन बाहर के" और “चुपके चुपके” अपनी मुस्कान से हर दुख हल्का कर दिया !
"राजा जानी" धरम जी हर दिल में कभी "लोफर" तो कभी अपनी "शराफत" से अमर “ही-मैन” और "सुपरमैन" बनकर बसते रहेंगे।
आज जब आप पर्दे के उस पार चले गए, तो लगता है जैसे ज़िंदगी का एक अध्याय...
“ड्रीम गर्ल” की मधुर धुन की तरह धीरे से ओझल हो गया, परन्तु हमेशा "आस - पास" ही रहेगा !
क्योंकि "अपने" तो अपने होते हैं ...
आपकी छवि, आपका काम, आपकी हर मुस्कान, हर संवाद, हर अंदाज़, सदा "हिम्मतवार" अपना "लोहा" मनवाती रहेंगी...
भारतीय सिनेमा के इतिहास में इस "यमला पगला दीवाना" जाट "राजपूत" की “कहानी किस्मत की” सदा के लिए " रज़िया सुल्तान" की "सल्तनत" की तरह अमर "सुल्तान" बनकर "जुगनू" सी रात के अंधेरे में भी कलाकारों और हम जैसे "एक महल हो सपनो का" सोचने वालों को "आँखें" देकर "ममता" प्रदान करती रहेंगी, और "ताकत" देती रहेंगी ...
अब और "कैसे कहूं कि प्यार है" धरम जी, और यही मेरा आपके लिए, अपने भी पिता जी को श्रद्धांजलि देने का "धरम- करम" है, क्योंकि वो भी आपको बहुत पसंद करते थे, वो क्यों, पूरा हिन्दुस्तान आपको पसंद करता है, और आज गमगीन है
अश्रुपूरित श्रद्धांजलि।

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