हम अंजाम-ए-ख़ास लिखेंगे

ख़यालात-ए-बंदगी हम तुझे इक अधूरी प्यास लिखेंगे
हक़ीक़त-ए-ज़िंदगी हम तुझे वो आख़िरी साँस लिखेंगे

मैं और मेरी आवारगी ताउम्र अब तेरे एहसास लिखेंगे
लोग जब फ़ना लिखेंगे, तो हम अंजाम-ए-ख़ास लिखेंगे

#Poetry is #Immortal #Soul of #Writing 

- अभय सुशीला जगन्नाथ 


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