आवाज़ हमारी इसी वादी में रहेगी

तुझे रखना अपने ख्यालों में ,
ये मेरी आदत ,
तू कहता " दीवानगी ", मैं कहता " इबादत "

कभी "अल्लाह - इश्वर" देखा नहीं ,
देखा सिर्फ याराना ,
तू कहता " काफिर", मैं कहता " दीवाना "

हर एक बात पे तेरा वो कहना,
"तुम्हें छोड़ेंगे नहीं"
तू कहता "दुश्मनी", मैं कहता "दोस्ताना"

“दोस्ताना” बचपन का , 
बचपन के दोस्त की शादी,
बीते लम्हों की याद में , 
आज मैंने “हिसाब” कर डाला,
ऐ दोस्त ! तुम “बे-हिसाब“ याद आये !


ये मेरे साथी हैं , बचपन के सही,
दोस्ती ये मगर ज़िन्दगी भर रही,

सताते कभी, तो रुलाते कभी,
मगर ज़िन्दगी भर हंसाते सभी,

गिरते हैं मगर फिर संभल जाते हैं,
क़फ़स  तोड़ कर हम निकल जाते हैं,

बुरा वक़्त हो , मगर ग़म नहीं,
जुदा होने वाले कभी हम नहीं,

हमे ज़िन्दगी लूट सकती नहीं ,
कि ये दोस्ती टूट सकती नहीं,
टूट सकती नहीं ...

ये है प्यार बरसों पुराना हमारा , सलामत रहे दोस्ताना हमारा

शहर में कोई अपने जैसा नहीं,
किसी और में जोर ऐसा नहीं,

किसी वक़्त चाहे बुला लो हमें,
अगर शक हो तो आजमा लो हमें,
आजमा लो हमें...

न जायेगा ख़ाली निशाना हमारा , सलामत रहे दोस्ताना हमारा

इन्हे छोड़कर मैं परेशान हुआ,
इनकी बेरुखी पे मैं हैरान हुआ,

मचल कर गले से लगाया मुझे,
मैं रूठा हुआ था मनाया मुझे,
मनाया मुझे ...

न रुस्वा हुआ ये फ़साना हमारा , सलामत रहे दोस्ताना हमारा

वो ख़्वाबों के दिन वो किताबों के दिन,
सवालों की रातें जवाबों के दिन,

कई साल हमने गुज़ारे यहाँ,
यहीं साथ खेले हुए हम जवां,
हुए हम जवां...

था बचपन बड़ा आशिकाना हमारा , सलामत रहे दोस्ताना हमारा

ना बिछड़ेंगे मर के भी हम दोस्तों,
हमें दोस्ती की क़सम दोस्तों,

पता कोई पूछे तो कहते हैं हम,
के एक दूजे के दिल मे रहते हैं हम,
रहते हैं हम...

नहीं और कोई ठिकाना हमारा , सलामत रहे दोस्ताना हमारा
बने चाहे दुश्मन ज़माना हमारा , सलामत रहे दोस्ताना हमारा

होंठों पे तो आया है वही भूला फ़साना,
लाऊं तो भला कैसे वो बचपन का ज़माना,
हो यार मिले दिल के आ गा ले ज़रा मिल के,
यादों का गीत सुहाना,
हमको न भुलाना कभी हमको न भुलाना,

आवाज़ हमारी इसी वादी में रहेगी,
आज की बातें ये कल भी कहेगी,
गूंजेगा गीत सुहाना,
हमको न भुलाना कभी हमको न भुलाना,
आवाज़ हमारी इसी ...





Comments

Popular posts from this blog

राधा-कृष्ण ! प्रेम के सात वचन !

बिन फेरे हम तेरे

Orange Candy - The First Proposal of My Boyhood