मुलाक़ात


ए दोस्त ,
न मिलने का इलज़ाम लगा,
मुकदमा ही कर दे मुझ पर,
कम से कम, 
तारीख दर तारीख,
मुलाक़ात तो होती रहेगी ...
गर फैसला भी आया तो,
मुलाकाते शाम की,
सजा काटने की यादें सजेंगी ...

                  - अभय सुशीला जगन्नाथ 

                

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