अभी नहीं ! कभी नहीं !

अभी अभी नहीं,
कभी कभी नहीं,
हमेशा हरपल,
तू ही बस मेरे साथ रही,
ये बातें भले ही तूने मुझसे,
और शायद मैने भी तुझसे ना कही,
साँसों में,
रगों में,
लहू बन,
मैं तुझमे,
और तू मुझमे,
बहती रही ! बहती रही !

                     - अभय सुशीला जगन्नाथ 

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