उषा की किरणों से, आशीर्वाद रुपी रोशनी !

एक खामोश रात,
एक चाँद ने धरा की शिखा को,
पहली बार,
अपनी ही दूधिया रोशनी से,
सुंदरता में जगमगाते देखा,
तो अपने गुमान से कहने लगा !

मेरी प्रकाशमयी रौशनी में,
तुम ज्यादा निखर जाती हो,
चलो सदा के लिए मेरी हो जाओ !

शिखा ने प्यार से कहा,
यह ग़लतफ़हमी है तुम्हारी, 
तुझ पर तो,
उषा की किरणों की मेहरबानी है,
वरना तुम भी बे-रौशन हो,
मैं तो उसी की रोशनी में,
और ज्यादा निखरती हूँ !

चाँद को तब,
अपनी गलती का अहसास हुआ,
और चाँद ने विनम्रता से कहा, 
क्षमा प्रिये !
मैं नादान भूल गया था,
चलो दोनों मिलकर,
उस प्यारी उषा की किरणों से,
आशीर्वाद रुपी रोशनी से,
अपना घर आँगन जगमगाएं !

इस बार उषा की रोशनी के लिए,
शिखा भी चाँद की बात मान गयी,
और चाँद तथा शिखा,
एक दूजे संग, 
आज भी उषा के आशीर्वाद से,
रोशन कर रहे हैं,
एक दूजे को,
और अपना घर आँगन !

ईश्वर करें चाँद और शिखा का,
घर आँगन यूँ ही,
उषा की प्रकाशमयी किरणों से,
सदा रौशन रहे और जगमगाता रहे !

सुनयना शिखा और दूधिया चाँद को उषा के आशीर्वाद से प्रसादित विवाह वर्षगांठ की हार्दिक शुभकामनाएं 

                                  -  अभय सुशीला जगन्नाथ 


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