उम्र-ए-रफ़्ता and रक्श-ए-उम्र

सुना था उम्र-ए-रफ़्ता लौटकर आती नहीं,

रक्श-ए-उम्र में जिक्र-ए-यार से अक्सरहां,

जोश-ए-जवानी सी मौज-ए-रवानी क्या है...


                                      - अभय सुशीला जगन्नाथ 



Comments