सुबह-ए-बनारस की रंगीनियों में, इक बेमिसाल नज़ारा लिए, मेरे ख़यालों की रहगुज़र से देखो , वो सुर्ख होठों इशारा लिए, गुज़र रही है शोख-ओ-शर्मीली, तबस्सुम-ए-पिन्हाँ शरारा लिए " La Belle Dame Sans Merci " - तपाक से फेसबुक पर एक अंग्रेजी की मेरी लिखी छोटी से कविता पर, हिन्दी और भोजपुरी के साथ साथ अंग्रेजी में भी अच्छी पकड़ रखने वाले, Ganesh Shankar Chaturvedi नेता जी ने कमेंट किया - " La Belle Dame Sans Merci " यह मेरे लिए एक बहुत बड़ी बात थी, एक साधारण सा 13 साल की युवा Teenage की शुरुआत से लिखते लिखते यहां तक पहुंचने वाले और शौकिया लिखने वाले के लिए यह एक असाधारण पैरलल बोले तो Comparision तो नहीं कहूंगा, परन्तु प्रेरणा टाइप जरूर कहूंगा, Inspiration ! परन्तु यह जरूर स्वीकार करूंगा कि अनजाने में दो Poet के खयालात मिलने की कहानी है ! आप भी थोड़ा कन्फ्यूज हो रहे होंगे, क्या लिखे जा रहा है जेलरवा आज, कुछ समझ नहीं आ रहा है ? तो शुरू से बताते हैं ! मैंने 16th August 2025 को एक अंग्रेजी में अपनी बनारस की यादों से उलझी कविता लिखी Once upon a Time... A Dawn in Banaras, so vivid...