आओ चाय पी जाए

आओ चाय पी जाए 

हुम तो चाय के शौकीन नथे
वो तो तुम संग बैठ के
प्यार के उन लम्हों को चुराने की
ख्वाहिश रखते थे
बहाना चाय का था
जताना प्यार को था
आज फिर हाथ में चाय है
और यादों में तुम और तुम्हारे होने
की कल्पनाये है...

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तुम साथ होते हो तो बाते होती है
ना होते हो तो शायरी होती है...

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जिंदगी की कशमकश में पन्नो पे
खुद को कभी उतारा नही
पर जब तुम मिले तो शुकुन भी मिला
और इन पन्नो को शायरी मिली

                                  - अभय सुशीला जगन्नाथ 


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