तृष्णगी काफ़िर

 दिल-ओ-जाँ में इक कसक सी है उनके मुन्तज़िर

और उनके आते ही सैलाब-ए-इश्क हुआ मुन्तशिर

मैं और मेरी आवारगी और उफ़ ये तृष्णगी काफ़िर


        - अभय सुशीला जगन्नाथ 



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