किशोर कुमार B'Day 4th Aug और " शराबी " के 50+ साल Special

किशोर कुमार B'Day 4th Aug और " शराबी " के 50+ साल Special

गर मय में असर होता तो जाम खुद झूम जाता
नशे में प्याले होते और मयकदे को सुरूर आता
मयकश मैं और मेरी आवारगी सोच रहे ऐ वाइज़
ये तो ग़म-ए-मस्ती हर शख्स पर है फितूर लाता
और बेजा ही मय-ओ-शराब पर है कुसूर आता..
किशोर दा की रिकॉर्डिंग रूम में आवाज गूंजी " क्यों भाई अनजान !"
'आजकल दूसरों के शब्दों से शायरी हो रही है , क्या अपने शब्दों की शायरी में वो बात नजर नहीं आ रही !'
किशोर कुमार का ये वाकया तब का है जब " शराबी " के गानों की रिकॉर्डिंग हो रही थी , तो हुआ कुछ यूँ की रिकॉर्डिंग के समय गाने की एक लाइन पढ़ते ही किशोर दा ने शब्दों को भांप लिया, और संगीत निर्देशक बप्पी लहरी से साफ मना कर दिया कि अगर यह लाइन नहीं बदली गई तो मैं गाना नहीं गाऊंगा क्योंकि वो जानते थे कि यह लाइन तो मोहम्मद रफ़ी पहले ही गा चुके हैं
फिर तो यह नाइंसाफी होगी कि दुबारा उन्हीं की लाइन पर, वह भी गाना रिकॉर्ड करें, तो बप्पी लहरी और अनजान ने जब उनको समझाने की कोशिश की तो किशोर दा ने उनसे सीधे दो टूक पूछ लिया
" क्यों भाई अनजान !"
'आजकल दूसरों के शब्दों से शायरी हो रही है, क्या अपने शब्दों की शायरी में वो बात नजर नहीं आ रही !'
" यह तो हसरत जयपुरी की लिखी लाइन है ना ? "
सभी लोग रिकॉर्डिंग रूम में एक दूसरे का चेहरा देखने लगे, और रिकॉर्डिंग रूम में क्षण भर को सन्नाटा पसर गया !
तब अनजान ने चुप्पी तोड़ते हुए घबराते हुए बताया -
किशोर दा मैने यह पंक्ति हसरत जयपुरी जी के गाने से नहीं बल्कि उर्दू के एक शायर आरिफ़ जलाली की शायरी से उठाई है...
ख़ुद अपनी मस्ती है जिस ने मचाई है हलचल
नशा शराब में होता तो नाचती बोतल
- आरिफ़ जलाली
अनजान आगे बोलते रहे -
किशोर दा ! सिर्फ एक लाइन आरिफ़ जलाली की है, लेकिन बाकी का पूरा गाना मेरा ख़ुद का लिखा हुआ है और वो एक-एक शब्द, मेरा अपने हैं !
तब किशोर दा ने मुस्कुराते हुए कहा, बहुत ही बढ़िया लिखा है, लोग पसंद करेंगे !
फिर निश्चिन्त होकर किशोर दा ने यह पंक्तियां ऐसी गायी कि अजर अमर हो गई !
शराबी के संगीत और गाने आज भी अजर अमर है , मगर मयकश, मयकशी और मयकदे की महफिलों में अगर एक बार यह गाना ना बजे तो महफिल पूरी नहीं होती
जी, मुझे नौलखा मांगा दे , गाने का किशोर द्वारा गाया, और अमिताभ और जयाप्रदा के द्वारा अभिनीत, बप्पी लहरी का कालजई संगीत, बेमिसाल !
नशा शराब में होता तो नाचती बोतल
मय-कदे झूमते, पैमानों में होती हलचल
नशे में कौन नहीं है, मुझे बताओ ज़रा
किसे है होश, मेरे सामने तो लाओ ज़रा
क्या ही कहने, तो अनजान को पूरा पढ़ते हैं, और शर्तिया इस गाने की जादूगरी का यकीन मानिए कि अब आप पढ़ते हुए भी गुनगुनाने लगेंगे...
लोग कहते हैं मैं शराबी हूँ
तुमने भी शायद ये ही सोच लिया,
किसी पे हुस्न का ग़ुरूर, जवानी का नशा
किसी के दिल पे मोहब्बत की रवानी का नशा
किसी को देख के साँसों से उभरता है नशा
बिना पिए भी कहीं हद से गुज़रता है नशा
नशे में कौन नहीं है, मुझे बताओ ज़रा
किसे है होश, मेरे सामने तो लाओ ज़रा
नशा है सब पे, मगर रंग नशे का है जुदा
खिली-खिली हुई सुबह पे है शबनम का नशा
हवा पे ख़ुशबू का, बादल पे है रिमझिम का नशा
कहीं सुरूर है ख़ुशियों का, कहीं ग़म का नशा
नशा शराब में होता तो नाचती बोतल
मयकदे झूमते, पैमानों में होती हलचल
नशा शराब में होता तो नाचती बोतल
नशे में कौन नहीं है, मुझे बताओ ज़रा
नशे में कौन नहीं है, मुझे बताओ ज़रा
लोग कहते हैं मैं शराबी हूँ
तुमने भी शायद यही सोच लिया,
लोग कहते हैं मैं शराबी हूं !
आरिफ़ जलाली की एक लाइन से पूरी शायरी लिखने की कला सिर्फ अनजान जैसे महान गीतकार को ही आती होगी, और उसी प्रेरणा स्रोत पंक्तियों को मैंने भी अपने शायरी में ढालने का प्रयास किया है ...
गर मय में असर होता तो जाम खुद झूम जाता
नशे में प्याले होते और मयकदे को सुरूर आता
मयकश मैं और मेरी आवारगी सोच रहे ऐ वाइज़
ये तो ग़म-ए-मस्ती हर शख्स पर है फितूर लाता
और बेजा ही मय-ओ-शराब पर है कुसूर आता..
शराबी का संगीत बप्पी लाहिरी ने रचा था, और यह उनके सर्वश्रेष्ठ तथा यादगार कार्यों में गिना जाता है।
इस एल्बम के लिए उन्हें सर्वश्रेष्ठ संगीत निर्देशक का फ़िल्मफ़ेयर पुरस्कार भी प्राप्त हुआ। एल्बम के सभी गीत अत्यंत लोकप्रिय हुए और आज भी श्रोताओं के बीच विशेष स्थान रखते हैं।
किशोर कुमार ने इस फ़िल्म के गीत “ मंज़िलें अपनी जगह हैं ” के लिए सर्वश्रेष्ठ पार्श्व गायक का अपना 7वाँ फ़िल्मफ़ेयर पुरस्कार जीता।
उल्लेखनीय बात यह रही कि उस वर्ष सर्वश्रेष्ठ पार्श्व गायक श्रेणी में नामांकित चारों गीत केवल किशोर कुमार के ही थे
“ दे दे प्यार दे ”,
“ इन्तेहाँ हो गई, इन्तज़ार की ”,
“ लोग कहते हैं मैं शराबी हूँ ” और
“ मंज़िलें अपनी जगह हैं ”
यह उपलब्धि आज भी एक अद्वितीय रिकॉर्ड मानी जाती है। एक ही सिनेमा और एक ही गायक और एक ही गीतकार वो संगीतकार, हैं ना अद्वितीय और अविस्मरणीय !
विशेष रूप से “ लोग कहते हैं मैं शराबी हूँ ” गीत, जो “ मुझे नौलखा मंगा दे ” का ही एक अंश है, और इस हिस्से को केवल किशोर कुमार ने अंतरे के रूप में अपनी आवाज़ दी थी, तो सिर्फ़ अंतरे को दिए स्वर के लिए फ़िल्फेयर नॉमिनेशन, यह भी एक अद्वितीय रिकॉर्ड है !
उसी अन्तरे से जुड़ी कहानी पर, अनजान की पंक्तियों से मिले प्रेरणा स्वरूप शायरी के साथ,
आज किशोर दा के संग, अंजान, बप्पी लहरी और प्रकाश मेहरा को एक विशेष श्रद्धांजलि देते...
मयकश मैं और मेरी आवारगी !

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