मेरे पास तुम हो

न पूछेंगे हाल तुमसे, न शिकवा करेंगे,
इन लबों बस तबस्सुम सजा जाइएगा अगर ज़िक्र मेरा कभी छिड़ भी जाए,
तो उस पल मेरे अश्कों चले आइएगा
कभी जो अकेले उन अश्क़ों से मिलना,
हमारा पता भी उनको ज़रा बताइएगा
मेरी आवारगी से उनको मिला लाइएगा - अभय सुशीला जगन्नाथ


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