क्रश और राज़-ए-मोहब्बत
स्कूल-कॉलेज के राज़-ए-मोहब्बत, लबों पे ठहरे से फ़साने थे,
धीमे-धीमे फुसफुसाते लफ़्ज़, दिल-ए-नादाँ के हसीं तराने थे...
धड़कनों में बसे वो क्रश, वक़्त की धूल में कहीं धुँधले पड़ गए,
मगर दोस्ती के वो शरारती बहाने... क्या ख़ूबसूरत ज़माने थे...
पहली झलक का असर,
और उससे जुड़ी दोस्ती के रंग .... क्या ही लिखूं ✍️
कुछ रिश्ते इश्क़ नहीं होते, फिर भी उम्र भर फीके नहीं पड़ते,
क्योंकि वक्त के साथ दोस्ती के ऐसे रंगों में रंगे जाते हैं...
जो कभी नहीं उतरते !
ऐसे ही कई क्रश और उससे जुड़े राज़-ए-मोहब्बत के राजदार संग पुरानी यादों के सफ़र में...
बचपन के उसी दोस्त के साथ,
मंदिर वाली गली, तालाब वाले डगर में...
मैं और मेरी आवारगी !
- अभय सुशीला जगन्नाथ

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