इश्क़-ए-मज़ाजी इश्क़-ए-हक़ीक़ी

कहीं-कोई जँचा ही नहीं कि इश्क़-ए-मज़ाजी करते

इश्क़-ए-हक़ीक़ी को फ़िर से रूह-ए-रवाँ उतार चले

मैं और मेरी आवारगी.. फ़िर तेरी गली बेक़रार चले


#SoulMate for #EternalLove in #LoveStreet 

इश्क़-ए-मज़ाजी =
सांसारिक मानवीय प्रेम
Human worldly romantic love

इश्क़-ए-हक़ीक़ी =
आत्मीय रूहानी प्रेम
Divine spiritual eternal love 

रूह-ए-रवाँ = 
वह आत्मा जो जीवन, प्रेम और भावनाओं को गति देती  
The soul that keeps one's feeling of love and life alive

- Abhay Sushila Jagannath 


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