तू ही वो हसीं है

तू ही वो हसीं है, तू ही वो हसीं है
जिसकी तस्वीर ख़्यालों में मुद्दत से बनी है
तू ही वो हसीं है...

रूख-ए-रौशन पे ज़ुल्फ़ें बिखराए हुए
जैसे चंदा पे बादल हों छाये हुये
मैंने देखा तुझे, तो मेरा दिल मुझे
यही कहने लगा
ढूँढे नज़रें जिसे दिन रात
कोई और नहीं है
तू ही वो हसीं है...

मेरी आवारा तबियत कोे
एक राह-ए-मुस्तकिल मिल गयी
अब ना मैं तरसूँगा राहत को
मुझे ख़्वाबों की मंज़िल मिल गयी
संगेमरमर की मूरत है तराशी हुई
मेरी आँखों को बरसों में तसल्ली हुई
मैंने देखा तुझे, तो मेरा दिल मुझे
यही कहने लगा
ऐसी ही किसी मूरत की
मेरे मंदिर में कमी है
तू ही वो हसीं है...



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