आज आया हूँ अपने घर Get link Facebook X Pinterest Email Other Apps - January 23, 2023 सालों रहे शहर दर-बदर,यूँ मिलकर जाने क्यों लगा,आज आया हूँ अपने घर !रुक, ज़रा सांस लेने दे,थोड़ी देर साथ ठहर,दिल की धड़कने जाने क्यों,बेकाबू धड़क रही बेकदर ! - अभय सुशीला जगन्नाथ Get link Facebook X Pinterest Email Other Apps Comments
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