खयालों आकर इक शाम रहगुज़ार करो..

फ़िर से मैं हकलाते होठों, वही इश्क़-ए-इज़हार करूं,

फ़िर से तुम भी सुर्ख लबों, शरमाते हुए इक़रार करो..


फ़िर से मैं इक वादा करूं, फ़िर से तुम ऐतबार करो

फ़िर से मैं तेरी राह देखूं, फिर से तुम इंतजार करो..


मैं और मेरी आवारगी, सोचते हैं यूँ ही कभी कभी..

बेजा हो चली जिंदगी को, फिर से तुम गुलज़ार करो


हकीकी में गर बाद-ए-सबा गुलज़ार ना कर सको !

फ़िर से मेरे खयालों आकर इक शाम रहगुज़ार करो..


#Happy #New #Year #HappyNewYear 

#नव #वर्ष की #शुभकामनाएं #नववर्षशुभकामना

#नया #साल #मुबारक़ #सालमुबारक़ #मुबारक़बाद

#Nostalgic #Nostalgia #Memoir #Memories


                                               - अभय सुशीला जगन्नाथ 




Comments

Popular posts from this blog

राधा-कृष्ण ! प्रेम के सात वचन !

बिन फेरे हम तेरे

परी-सुरसुन्दरी, अप्सरा-देवांगना