मुसव्विर का ख़्वाब-ए-शहकार

सुबह-ए-बनारस फाइन आर्ट्स में, वो बाद-ए-सबा महकाती लड़की,

कैनवास-ए-शहर को ख़ुदा-सा छूकर, ज़िंदगी रंगों से सजाती लड़की,

इक मुसव्विर को हमने यूँ देखा, वो ख़्वाब-ए-शहकार बनाती लड़की


- अभय सुशीला जगन्नाथ 



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