रंग-ओ-निकहत निखरे और गहरे

हर इक ख़्वाब खिले, रंग-ओ-निकहत निखरे और गहरे

हँसी - खुशी हर शाम सजे और सजे हर सुबह-ओ-सवेरे

Wishes for Love and Togetherness


- अभय सुशीला जगन्नाथ  


Comments

Popular posts from this blog

राधा-कृष्ण ! प्रेम के सात वचन !

बिन फेरे हम तेरे

परी-सुरसुन्दरी, अप्सरा-देवांगना