न कभी तूने बुलाया

तेरा शहर, वो तेरी गलियां यूँ छोड़कर के जाना हुआ,

कि फिर न कभी तूने बुलाया, न मेरा ही आना हुआ

मैं वापस आऊँगा, बस याद रखना तू वक़्त-ए-दुआ...


 - अभय सुशीला जगन्नाथ  





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