बेजा ही मय-ओ-शराब पर है कुसूर आता
गर मय में असर होता तो जाम खुद झूम जाता
नशे में प्याले होते और मयकदे को सुरूर आता
मयकश मैं और मेरी आवारगी सोच रहे ऐ वाइज़
ये तो ग़म-ए-मस्ती हर शख्स पर है फितूर लाता
और बेजा ही मय-ओ-शराब पर है कुसूर आता...
- अभय सुशीला जगन्नाथ
नशे में प्याले होते और मयकदे को सुरूर आता
मयकश मैं और मेरी आवारगी सोच रहे ऐ वाइज़
ये तो ग़म-ए-मस्ती हर शख्स पर है फितूर लाता
और बेजा ही मय-ओ-शराब पर है कुसूर आता...
- अभय सुशीला जगन्नाथ

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