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Showing posts from July, 2025

सय्यारा - सैयारा

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फ़ानी जिस्म से किसी रोज़ जब निकल जाएगी रूह-ए-रवाँ... मिलेंगे दोनों फ़िर उस कहकशाँ सय्यारा बन सितारों के जहाँ #सय्यारा #Saiyaara #सैयारा - अभय सुशीला जगन्नाथ

अपनी सिधिया मौसी का, मां की तीन बहनों में मझली बहन !

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का बबुआ कब अइलS हS ! अकेले आइल बाड़S, कि दीदियो आइल बियाS ! कब ले रहे के बाS ! जब तक वो एक खिली मुस्कान लिए इतने प्रश्न पूछती, उतनी देर में मैं उनके पैर तक झुक जाता और एक एक कर जवाब देता ! अपनी सिधिया मौसी का, मां की तीन बहनों में मझली बहन ! = अम्मा अउर बबियो आइल बिया, गरमिया के छुट्टिया भईल बा, त रहेम सन अबहिं महीना भर ! तो पीछे से गुड्डू की आवाज आती, खड़हीं - खड़हीं सब पूछ लेबे का ए माई, बईठे के ना कहबे भइया के, जो पानी-उनी ले आव, चाय बनवाव, बबी से कह दे ! मुझे अपने घर के दुआर पर देखते ही, दिवंगत गुड्डू भाई (पत्रकार) की मां और मेरी मौसी जी के एक सांस में सारे प्रश्न पूछने का सिलसिला, आज से बस यादों और खयालों में शामिल हो गया, पर उसकी और गुड्डू की आवाज मेरी अंतिम सांस तक गूंजेगी ! ल भइया चाय , पिय ! और मौसी का पीछे से बोलना, मिठइया आ नमकीनवा त खा लेवे दे हमरा बबुआ के... ल ना बबुआ, खा लS ! दीदिया से आएम मिले खातिर सांझ के, जयिह त बता दिह ! = अब मौसी हम, का बोलीं अउर का लिखीं , समझ में नायिखे आवत तू ही अम्मा आ गुड्डू से बोल दिह, हम जहवां भी बानी, उन्कारा लोग के याद करत रहिला, भले आंख ड...

Emotional Nostalgia / भावनात्मक यादें

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  Emotional Nostalgia / भावनात्मक यादें .... इस ख़ज़ाने / Treasure को साझा करने से खुद को रोक नहीं पाया ... प्रिय अभय भाई, सप्रेम नमस्कार। सबसे पहले आपको जन्मदिन की ढेरों हार्दिक शुभकामनाएँ! ईश्वर से यही प्रार्थना है कि वह आपको दीर्घायु, उत्तम स्वास्थ्य और अपार सफलताएँ प्रदान करे। अभय, जब भी बचपन की यादें आँखों के सामने आती हैं, तो सबसे पहला नाम जो मन में आता है – वो तुम्हारा ही होता है। वो क्लासरूम की शरारतें, तुम्हारा हर बार फ़र्स्ट आना, और हम सबका तुम्हें देखकर प्रेरित होना – वो सब जैसे कल की ही बातें लगती हैं। तुम्हारी मेहनत, अनुशासन और सादगी हमेशा प्रेरणादायक रही है। आज तुम दिल्ली में हो, जीवन में ऊँचाइयों को छू रहे हो – यह जानकर दिल से गर्व महसूस होता है। भले ही हम आज थोड़ी दूरियों में बँटे हैं, लेकिन दिलों की नज़दीकियाँ अब भी वही हैं। तुम्हारा यह जन्मदिन तुम्हारे जीवन में खुशियाँ, शांति और सफलता की नई किरणें लेकर आए, यही कामना है। एक प्यारे दोस्त को, एक यादगार बचपन के साथी को – दिल से जन्मदिन की ढेरों शुभकामनाएँ। “जन्मदिन की बहुत बहुत बधाई हो अभय भाई!” आपका मित्र, अभिलेश वर्...

इश्क़ से कह दो ले आए कहीं से सावन

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भिगोने हैं अल्हड़ बारिशों से फ़िर बेज़ा दामन जाओ इश्क़ से कह दो ले आए कहीं से सावन  - अभय सुशीला जगन्नाथ  

शिवानियाँ डालेंगी, सुनयनों जब शिवाय काजल

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फ़ीके आज से पड़ने लगेंगे, सावन के सब कजरारे बादल जल लिए शिवानियाँ डालेंगी, सुनयनों जब शिवाय काजल गलियों इठलाती अल्हड़ पैरों, छनकाती वो बनारसी पायल - अभय सुशीला जगन्नाथ  

आंखों में समेट तो लेने दो ख्वाबों को

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#गुरु कहते रहे आंखों में बसा लो किताबों को हमने कहा आंखों में समेट तो लेने दो ख्वाबों को ख्वाबों के ये सवाल ही खोजेंगे नए जवाबों को✍️                                                           - अभय सुशीला जगन्नाथ  

Chocolate Day !

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Memoirs in my heart, Creating an ardent art... I am getting more, and more passionate, while baking a chocolate… Rich chocolate when melts warm, In my emotions, a fire takes form, A tender art, both bold and bright, A playful dream wrapped in delight... Pouring the sweetness, of all your Love, I am creating the Greek idol, Aphrodite; the Dove… The Goddess of Beauty and passionate Love ! Come, taste this love, I have shaped with care A sentimental creation, beyond compare… On Chocolate Day, when we are apart… Memoirs in my heart, Creating an ardent art... - Abhay Sushila Jagannath

मंजिल की तलाश, रहनुमा की मिसाल

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होंगे कोई जिनकी है डगर, किसी मंजिल की तलाश में आवारगी मेरी उस रहगुज़र, रहनुमा जिसकी मिसाल दें क्लास 3 केंद्रीय विद्यालय BHU, जुलाई-अगस्त का नया सेशन, सन 1984 टी सी लेकर पापा जी ने बोला " घर चलें !" और मेरा रोना शुरू, आंसू रुकने का नाम ही नहीं ले रहे थे, क्योंकि 2 साल तक BHU के मित्रों का साथ ऐसा था, जो आज भी यादगार हैं, वह सब अब छूट रहा था, हमेशा के लिए ! मैं घर पर तो तब से ही रो रहा था, जब से यह बताया गया, कि हमारा ट्रांसफर सीट DLW वाले केंद्रीय विद्यालय में पक्का हो गया है, परंतु अंतिम दिन पहाड़ था, जो आज भी जब कभी याद आता है, तो एक नन्हे बच्चे का अपने दोस्तों से बिछड़ने का ग़म ताजा हो जाता है जिसमें Ratndeep Singh , Anuroop Kabthiyal और Ashutosh Mishra प्रमुख हैं परन्तु सबसे ज्यादा गमगीन मैं अपने जिगरी दोस्त से बिछड़ने के कारण था, Gyanendra Johri , जो बाल निकेतन के नर्सरी से मेरे साथ था, फिर KV BHU भी साथ में ही नहीं बगल वाली सीट पर ही रहा खूब रोया, 3 - 4 दिन तक रोया, परन्तु सब बेकार, ट्रांसफर का दर्द सिर्फ उन्हें ही पता होगा, जिन बच्चों के स्कूल बदले जाते हैं, ख़ासकर ...