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T20 World Cup 2024 WIN

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 अफ्रीका वालन के चढ़ा के झाड़, बुमराह-अर्शित दिहलन उतार 13 साल बाद कोहली-शरमा जी, भारतीयन के भेजलन ख़ुशी अपार  पांड़े जी मगर इतिहास हो गइलन, जब यादव जी धईलन उ कैच ...ड़ फाड़                                                                                   - अभय सुशीला जगन्नाथ  शरमा-कोहली के हौसला अफ़ज़ाई से, युवा भारत को अब नए उड़ान मिलेंगे, रौशनी से धरा पर नई कोपलें फूटेंगी, फिर कई पौध अपने सफर पर चलेंगे ...                                 - अभय सुशीला जगन्नाथ

संगीत......विज्ञान और कला

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विज्ञान और कला बीच शंकित विकार,  इन दो अलग दुनिया का लेकर विचार, जब पहुंचे हम शिव और कृष्णा के द्वार, दोनों ने बतलाया इनके मध्य का आधार, संगीत है विज्ञान और कला का अभिसार ! संगीत के प्रथम धुन, नाची झूम के शिवानी, राधा अपने प्रेम मगन, मीरा व्याकुल दीवानी ! Music is bridge between Art and Science which are conceptually two different world. Music let you understand the affinity between these two and celestial sphere which in turn leads to understand life. संगीत... कला और विज्ञान के बीच का सेतु है जो वैचारिक रूप से दो अलग दुनिया हैं। संगीत आपको इन दोनों और आकाशीय मंडल के बीच के संबंध को समझने देता है जो बदले में जीवन को समझने में मदद करता है ।                      - अभय सुशीला जगन्नाथ 

हाँकत-डोलावत बेनिया

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ललना-लल्ली लिलार पोंछे, सोचें कइसे ई पसीना सुखायीं गरमी-बेसरमी के माथा प, सावन-भादो के छींटा बरखायीं हाँकत-डोलावत बेनिया माई के, बाबूजी रउवा ले ले आयीं                                                              - अभय सुशीला जगन्नाथ     

एक आवारा रात का समाँ

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मशरूफियत में मशगूल थे, फुर्सत थी न जाने कहाँ, आज यारों ने महफ़िल सजा, जगाई ज़िन्दगानी वहां, वो अल्हड़ रवानी जहाँ, हुई फिर वहीं जवानी जवां... कल तक जो दिल-ओ-जान थे, हुए न जाने गुम कहाँ, हुस्न-ए-जाना के जिक्र से, हुई वो पुरानी कहानी रवां... अन्ना डॉन के सरदार, और एक आवारा रात का समाँ !                                                                    - अभय सुशीला जगन्नाथ  -------------------------------------------------------------------------------- मशरूफियत में मशगूल थे, फुर्सत थी न जाने कहाँ, आज यारों ने महफ़िल सजा, जगाई ज़िन्दगानी वहां, हुई फिर वहीं जवानी जवां, और अल्हड़ रवानी रवां... हुस्न-ए-जाना के जिक्र से, हुई वो पुरानी कहानी जवां, कल तक जो दिल-ओ-जान थे, हुए न जाने गुम कहाँ... मैं और मेरी आवारगी, और एक आवारा रात का समाँ !                           ...

माँ का मांगा था

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आज लिखते हुए हांथ कांप रहे हैं, कल दुआओं के लिए उठाते कांपेंगे  अब तलक जो मिला माँ का मांगा था माँ का चला जाना जीवन की वो क्षतिपूर्ती है, जो कभी पूरी नही हो सकती                                                                                             - अभय सुशीला जगन्नाथ 

मिले तन्हा दो अकेले

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ढूंढ़ते फिर रहे आज फिर, मैं और मेरी आवारगी, बचपन की अल्हड़ यादें, जवां ख्वाबों के वो मेले... हसीन उन मंजरों मुस्काते, मिले तन्हा दो अकेले !                                            - अभय सुशीला जगन्नाथ  ढूंढ़ते फिर रहे आज फिर, मैं और मेरी आवारगी, बचपन की अल्हड़ यादें, जवां ख्वाबों के वो मेले... हसीं उन मंजरों मुस्काते, तन्हा ख़यालों दो अकेले ! अल्हड़ बचपन की युवा जवानी और आवारा संग आवारगी I've waited far too long for this catch up ! Cause I am proud to have friend like you, and with you, I had the best time always. Remembering all those School and DLW Days, I was Nostalgic. The Lunch was amazing and exciting was Evening Tea ! 💞 दिल की गलियों गुजरते, दोनों ने कई खेल खेले, हसीन उन मंजरों मुस्काते, मिले तन्हा दो अकेले, ढूंढ़ते फिर रहे आज फिर, मैं और मेरी आवारगी, बचपन की अल्हड़ यादें, वो जवां ख्वाबों के मेले...                   ...

स्वेटर की गिरह

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  जीवन की उलझी-उधड़ी, स्वेटर की गिरह खोल जाओ ना, नए ऊन का गोला लिए, माँ आँखों पे वो चश्मा चढ़ाओ ना, फिर से मेरे उन ख़्वाबों की, बुनाई-सिलाई करने आओ ना...                                                             - अभय सुशीला जगन्नाथ